Sunday, 9 June 2013

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

सुगम बना हर डगर, कर सुघर
होगा हर बीहड़ सहर, पार करेगा तू अंधेर गलियां ,
सफलता हर हाल में हो तेरी,
कर ले यह प्रण तू,  सुलझाएगा तू हर पहेलियाँ

आज है इस पड़ाव , कल उस पड़ाव होगा तेरा डेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

छोड़ अपने कदमो के निशां, लम्हों की सुनहरी रेत पर
याद करे ज़माना तुझे, लिख दास्ताँ ऐसी भौतिक पटल पर
गिरना भी होगा तुझे, संभलेगा फिर खुद ही,
रुकने का जब करे दिल तेरा, प्यास थोड़ी और तीव्र कर,

हटेगा फिर हर ओझलता का सेहरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

बन शिला कर प्रहार, जब हो मुश्किलें बड़ी
नम्रता हो तेरा बल, जब सरल लगे रास्ते हर घडी
वाणी में हो कोमलता कमल सी, फिर हर दिल पर करेगा राज तू
आत्मविश्वास से भरा हो हर कदम
पायेगा मंजिल हर हाल में तू

हजारों मीलों के इस सफ़र में, खुद का तू  ही होगा सहारा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा