यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
सुगम बना हर डगर, कर सुघर
होगा हर बीहड़ सहर, पार करेगा तू अंधेर गलियां ,
सफलता हर हाल में हो तेरी,
कर ले यह प्रण तू, सुलझाएगा तू हर पहेलियाँ
आज है इस पड़ाव , कल उस पड़ाव होगा तेरा डेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
छोड़ अपने कदमो के निशां, लम्हों की सुनहरी रेत पर
याद करे ज़माना तुझे, लिख दास्ताँ ऐसी भौतिक पटल पर
गिरना भी होगा तुझे, संभलेगा फिर खुद ही,
रुकने का जब करे दिल तेरा, प्यास थोड़ी और तीव्र कर,
हटेगा फिर हर ओझलता का सेहरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
बन शिला कर प्रहार, जब हो मुश्किलें बड़ी
नम्रता हो तेरा बल, जब सरल लगे रास्ते हर घडी
वाणी में हो कोमलता कमल सी, फिर हर दिल पर करेगा राज तू
आत्मविश्वास से भरा हो हर कदम
पायेगा मंजिल हर हाल में तू
हजारों मीलों के इस सफ़र में, खुद का तू ही होगा सहारा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
सुगम बना हर डगर, कर सुघर
होगा हर बीहड़ सहर, पार करेगा तू अंधेर गलियां ,
सफलता हर हाल में हो तेरी,
कर ले यह प्रण तू, सुलझाएगा तू हर पहेलियाँ
आज है इस पड़ाव , कल उस पड़ाव होगा तेरा डेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
छोड़ अपने कदमो के निशां, लम्हों की सुनहरी रेत पर
याद करे ज़माना तुझे, लिख दास्ताँ ऐसी भौतिक पटल पर
गिरना भी होगा तुझे, संभलेगा फिर खुद ही,
रुकने का जब करे दिल तेरा, प्यास थोड़ी और तीव्र कर,
हटेगा फिर हर ओझलता का सेहरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
बन शिला कर प्रहार, जब हो मुश्किलें बड़ी
नम्रता हो तेरा बल, जब सरल लगे रास्ते हर घडी
वाणी में हो कोमलता कमल सी, फिर हर दिल पर करेगा राज तू
आत्मविश्वास से भरा हो हर कदम
पायेगा मंजिल हर हाल में तू
हजारों मीलों के इस सफ़र में, खुद का तू ही होगा सहारा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
Bhut hi inspirational or sundar kavita...
ReplyDeletejaane kya hua aisa ki sab kala hogaya
ReplyDeletemein khud ki talash mein gum hogaya
pata nai kyu har chiz tuti tuti lagti h ab
khud par khud apne shabdo ka taala sa padh gaya
ab to tute hue khwaboo mein haqeeqat dhundta hun
bejaan baaton mein teri ibadat dhundta hun
hum kuch itna jada miley ek dusre se
ab bichad k b bichad nai pa raha hun mein
tum dhire se uthi or bina kuch kahe chal di
mein aaj b usi jagah uss pal mein tham gaya hun
apne khwabo ko jo jarjar kila tha
wo dil k jaljalle se gir gaya
or mein fir se akela reh gaya
na jaane kya hua aisa ki sab kala hogaya