Wednesday, 31 July 2013

चंचल से नैना

इतने चंचल न होवे नैना, जिगर में प्यास दिए दिन रैना
दिल की  तड़प को पढ़ ले ज़ालिम, जब जब अन्दर से झांके नैना

इन्हीं चंचल नैनों ने जाने क्या कब किस पर ज़ुल्म किये,
भोले से कितने चेहरों पर जब ज़ी चाहा, सितम हैं किये,

सजा सुनहरे ख्वाबों को , इसने कितनों की फितरत बदली  है;
हसरत कितनों की बदली है , सोहरत किस किस की लूटी है;

वार करे मदमस्त लगे, दो धारी तलवार ये नैना;
घायल कर जिया को, इस कदर खुश होवे नैना
इतने  चंचल न होवे नैना

उन मखमली पलकों के पीछे भी कुछ सपने छुपे तो हैं,
दर्द के हर एक दस्तक पर, मोती इनसे बहे तो हैं

हर डगर, हर पहर, एक नयी कहानी कहते से नैना
सब  सहकर चुप रहकर, बयां कशिश कर रोवे नैना
कुछ नादाँ से हैं ये नैना, जिगर में प्यास दिए दिन रैना
दिल की  तड़प को पढ़ ले ज़ालिम, जब जब अन्दर से झांके नैना

इतने चंचल न होवे नैना 

No comments:

Post a Comment

Your suggestion and feedback will help me make this blog more enjoyable, readable and "kavyastic"!