अनोखे से उस दुनिया में, कुछ लोग अनोखे बसते थे;
मस्ती के उन लम्हों में, हंसी के फ़साने बुनते थे;
याद फिर उन लम्हों की आती है,
होठों पे खुशियों की चादर बिछाया करते थे
"शबनम" सी थी वह चांदनी, "सिंधु" की वाक् धारा बहती थी
"दीन" होता था कितना रमणीय, "प्रवीण" जब कार्यशैली होती थी
शबनम की अदा निराली, नखरे कुछ अजब से होते थे
"नारायण" की टिप्पणियों पर हंसी के फव्वार्रे छूटते थे
Farzu, Dinsu, Shabbu, Sandra -- ये नाम कर्णप्रिय होते थे,
Garry, Bajji, Sami, JayD के सब लोग दीवाने होते थे;
Poonam, Halini, Anu जैसे कुछ नाम नए से उभरे थे,
"Sudha Rani" भी रानी थी, Ethinic day पर जब हम सजते थे;
हिरणी सी आँखें थी उसकी, Halini' तो आखिर हरिणी थी,
मधुर स्वर और भोलापन, सबको आकर्षित करती थी
Paul was the man, man! Deeps भी सुर्ख़ियों में होती थी
रोज़ रंग चढ़ता था नया, और समां भी नयी बंधती थी
संगीत के चाहने वालों की, एक फ़ौज़ भी उमड़ा करती थी
उत्साहित, उत्प्रेरित से थे सब लोग, उदासी के निशाँ दुर्लभ होते थे
शब्दों के ही बाण सभी के, लफ्जों में हंसी के स्वर भरते थे
हर-एक की सफलता में हम, अपनी भी सफलता देखते थे
लम्हें शायद वह अब भी वहीँ, पृथक पर हम हो चले हैं
हंसी ख़ुशी तो है अब भी, पर थोड़े नीरस से हो चले हैं
रहे सदा वह आलम ख़ुशी का, लोग तो आते जाते रहेंगे
पर उन अनोखे लम्हों को, हम याद हमेशा किया करेंगे |
मस्ती के उन लम्हों में, हंसी के फ़साने बुनते थे;
याद फिर उन लम्हों की आती है,
होठों पे खुशियों की चादर बिछाया करते थे
"शबनम" सी थी वह चांदनी, "सिंधु" की वाक् धारा बहती थी
"दीन" होता था कितना रमणीय, "प्रवीण" जब कार्यशैली होती थी
शबनम की अदा निराली, नखरे कुछ अजब से होते थे
"नारायण" की टिप्पणियों पर हंसी के फव्वार्रे छूटते थे
Farzu, Dinsu, Shabbu, Sandra -- ये नाम कर्णप्रिय होते थे,
Garry, Bajji, Sami, JayD के सब लोग दीवाने होते थे;
Poonam, Halini, Anu जैसे कुछ नाम नए से उभरे थे,
"Sudha Rani" भी रानी थी, Ethinic day पर जब हम सजते थे;
हिरणी सी आँखें थी उसकी, Halini' तो आखिर हरिणी थी,
मधुर स्वर और भोलापन, सबको आकर्षित करती थी
Paul was the man, man! Deeps भी सुर्ख़ियों में होती थी
रोज़ रंग चढ़ता था नया, और समां भी नयी बंधती थी
संगीत के चाहने वालों की, एक फ़ौज़ भी उमड़ा करती थी
उत्साहित, उत्प्रेरित से थे सब लोग, उदासी के निशाँ दुर्लभ होते थे
शब्दों के ही बाण सभी के, लफ्जों में हंसी के स्वर भरते थे
हर-एक की सफलता में हम, अपनी भी सफलता देखते थे
लम्हें शायद वह अब भी वहीँ, पृथक पर हम हो चले हैं
हंसी ख़ुशी तो है अब भी, पर थोड़े नीरस से हो चले हैं
रहे सदा वह आलम ख़ुशी का, लोग तो आते जाते रहेंगे
पर उन अनोखे लम्हों को, हम याद हमेशा किया करेंगे |
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