मिले थे कभी हम तुम
ख़ामोशी में थे यूँ गुमशुम
वो पल, वो रुत, वो रंग, वो ढंग
वो चाल, वो ढाल, वही थी वो अदा
वक़्त ने छीना हो भले ये सब हमसे,
दिल की नाराजगी वही,
धड़कन भी वही,
बस वही हूँ मैं
डरा डरा सा सहमा सा मैं
लड़कपन की दौर में सुलझा उलझा सा मैं
खोया हूँ शायद कुछ रंग अपने,
सच करना चाहे दिल, देखे हुए हर एक सपने
कुछ चेहरे खोये हैं बस,
सपने अब भी वही, ज़िन्दगी अब भी वही
बस वही हूँ मैं,
हाँ, वही हूँ मैं
ख़ामोशी में थे यूँ गुमशुम
वो पल, वो रुत, वो रंग, वो ढंग
वो चाल, वो ढाल, वही थी वो अदा
वक़्त ने छीना हो भले ये सब हमसे,
दिल की नाराजगी वही,
धड़कन भी वही,
बस वही हूँ मैं
डरा डरा सा सहमा सा मैं
लड़कपन की दौर में सुलझा उलझा सा मैं
खोया हूँ शायद कुछ रंग अपने,
सच करना चाहे दिल, देखे हुए हर एक सपने
कुछ चेहरे खोये हैं बस,
सपने अब भी वही, ज़िन्दगी अब भी वही
बस वही हूँ मैं,
हाँ, वही हूँ मैं