Friday, 4 October 2013

बस वही हूँ मैं

मिले थे कभी हम तुम
ख़ामोशी में थे यूँ गुमशुम
वो पल, वो रुत, वो रंग, वो ढंग
वो चाल, वो ढाल, वही थी वो अदा
वक़्त ने छीना हो भले ये सब हमसे,
दिल की  नाराजगी वही,
धड़कन भी वही,
बस वही हूँ मैं
डरा डरा सा सहमा सा मैं
लड़कपन की दौर में सुलझा उलझा सा मैं

खोया हूँ शायद कुछ रंग अपने,
सच करना चाहे दिल, देखे हुए हर एक सपने
कुछ चेहरे खोये हैं बस,
सपने अब भी वही, ज़िन्दगी अब भी वही
बस वही हूँ मैं,
हाँ, वही हूँ मैं

Tuesday, 6 August 2013

ठहरे से इन लम्हों में

ठहरे से इन लम्हों में, फिर आज कोई हलचल भर दो
नैनों के खाली प्यालों में, फिर आज कोई शरबत भर दो

जुल्फों का संवारना कानों के पीछे, अब भी आता है याद मुझे
फिर धीरे से मुस्कुरा कर, नज़रें झुकाना है याद मुझे
भीनी खुशबू उन जुल्फों की, अब भी करती मदहोश मुझे

उन भींगे लटों से छूकर, गुदगुदी बदन में फिर  दो
ठहरे से इन लम्हों में , फिर आज कोई हलचल भर दो

शरारती उन आँखों का चमकना ,बिजली भरती थी तन मन में
पलकों से इशारा कर, झट से पलटना है याद मुझे
होठों पे हंसी के रंगीं शबनम, अब भी बारिश करते मन में

तन्हाई के इस दामन में, फिर थोड़ी सी शरारत भर दो
ठहरे से इन लम्हों में, फिर आज कोई हलचल भर दो

Friday, 2 August 2013

थोड़ा और बरस


अभी ना हुए सराबोर
तन मन लागे अब भी कठोर
बादल तू थोड़ा और बरस

तस्वीर पिया की जिया में, अभी ना धुली  है
अंखियन में प्यास मोतीयन की, अभी ना बुझी है
भुलाने याद पिया की, न जाने जाना है किस ओर
तन मन लागे अब भी कठोर
बादल तू थोड़ा और बरस
थोड़ा और बरस

दिवा स्वप्न अब भी देखे मन हर पहर
उठती गिरती आवेगों और संवेगों की लहर
धुआं धुआं सा है हर सेहर, हर डगर
बहुत हुआ ये तकना राहों का
शैयां आ जाओ,
कर दो फिर से भोर

तन  मन लागे अब भी कठोर
बादल तू थोड़ा और बरस
थोड़ा और बरस 

Wednesday, 31 July 2013

चंचल से नैना

इतने चंचल न होवे नैना, जिगर में प्यास दिए दिन रैना
दिल की  तड़प को पढ़ ले ज़ालिम, जब जब अन्दर से झांके नैना

इन्हीं चंचल नैनों ने जाने क्या कब किस पर ज़ुल्म किये,
भोले से कितने चेहरों पर जब ज़ी चाहा, सितम हैं किये,

सजा सुनहरे ख्वाबों को , इसने कितनों की फितरत बदली  है;
हसरत कितनों की बदली है , सोहरत किस किस की लूटी है;

वार करे मदमस्त लगे, दो धारी तलवार ये नैना;
घायल कर जिया को, इस कदर खुश होवे नैना
इतने  चंचल न होवे नैना

उन मखमली पलकों के पीछे भी कुछ सपने छुपे तो हैं,
दर्द के हर एक दस्तक पर, मोती इनसे बहे तो हैं

हर डगर, हर पहर, एक नयी कहानी कहते से नैना
सब  सहकर चुप रहकर, बयां कशिश कर रोवे नैना
कुछ नादाँ से हैं ये नैना, जिगर में प्यास दिए दिन रैना
दिल की  तड़प को पढ़ ले ज़ालिम, जब जब अन्दर से झांके नैना

इतने चंचल न होवे नैना 

Sunday, 9 June 2013

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

सुगम बना हर डगर, कर सुघर
होगा हर बीहड़ सहर, पार करेगा तू अंधेर गलियां ,
सफलता हर हाल में हो तेरी,
कर ले यह प्रण तू,  सुलझाएगा तू हर पहेलियाँ

आज है इस पड़ाव , कल उस पड़ाव होगा तेरा डेरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

छोड़ अपने कदमो के निशां, लम्हों की सुनहरी रेत पर
याद करे ज़माना तुझे, लिख दास्ताँ ऐसी भौतिक पटल पर
गिरना भी होगा तुझे, संभलेगा फिर खुद ही,
रुकने का जब करे दिल तेरा, प्यास थोड़ी और तीव्र कर,

हटेगा फिर हर ओझलता का सेहरा
यह कदम तेरे और पथ भी तेरा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

बन शिला कर प्रहार, जब हो मुश्किलें बड़ी
नम्रता हो तेरा बल, जब सरल लगे रास्ते हर घडी
वाणी में हो कोमलता कमल सी, फिर हर दिल पर करेगा राज तू
आत्मविश्वास से भरा हो हर कदम
पायेगा मंजिल हर हाल में तू

हजारों मीलों के इस सफ़र में, खुद का तू  ही होगा सहारा
बस चला चल, चाहे हो निशा या हो सवेरा

यह कदम तेरे और पथ भी तेरा

Friday, 31 May 2013

मन तू प्यासा प्रेम का

मन तू प्यासा प्रेम का, चल चलें उसीकी तलाश में

बुझ जाये आज ये अगन भी, कब तक रहें इस प्यास में
ले चलो पार ये नैया भी तुम, उन्मुक्त अचल परिवास में

हो आज प्रबल बन प्रखर, डगर है बड़ा ये कठिन
तीखे मोड़ करेंगे कोशिश,
रुकना ना तू,
पड़ना ना तू इन अवरोधों के कयास में

ले चलो पार ये नैया भी तुम, उन्मुक्त अचल परिवास में

बरसाओ बादल आज सुधा तुम,
दिखा आज फिर सतरंगी सपने,
मिले कुछ  राहत ह्रदय के जलन को,
नयन कब से हैं तरसे, दिलबर की आस में

मन तू प्यासा प्रेम का, चल चलें उसीकी तलाश में
बुझ जाये आज ये अगन भी, कब तक रहें इस प्यास में

Saturday, 25 May 2013

ख्वाहिश थी तुझमें खोने की


ख्वाहिश थी तुझमें खोने की, हसरत भी थी ग़म में रोने की साथ

हर राह चुनुं मैं तेरे साथ, ख्वाहिश थी उनपर चलने की साथ
हँसना भी चाहा था साथ, चाहत की थी रोने की भी तेरे साथ
तेरे साये में रहूँ मैं हरदम, तेरी धड़कन मेरा नाम लें
जब धड़कन लगे रुकने, तू ही आ कर थाम ले

ख्वाहिश थी तुझमें खोने की, हसरत भी थी तेरे ग़म में रोने की साथ

चांदनी रात हो, नीला अम्बर हो झील के पार
चाँद भी हो आगोश में मेरे, तारों की चमक देखूं तेरे आंचल के पार
समुन्दर की गहराई से रूबरू होऊं मैं, जब करूँ तेरे आँखों का दीदार
सारी दुनियां भुलाऊँ जब साथ हो तेरी  बाँहों का गलहार

ख्वाहिश थी तुझ  में समाने की, हसरत थी साँसों की माला गिनने की साथ

जब शाम की चादर ढले, बाँहों के दरमियाँ तुझको पाऊँ
हर करवट हो तेरे साथ, करवटों की सलवटें  भी  तेरे साथ
धड़कन की आहट हो साथ, सिसकन और सिहरन भी साथ
साँसों की थिरकन हो साथ, थिरकन के क्रंदन भी साथ

ख्वाहिश थी तुझमें खोने की, हसरत भी थी ग़म में रोने की साथ

जिंदगी के कुछ हसीं पल साथ ले कर चलूँगा मैं
तेरी याद जब जब आएगी एक गीत गाया करूँगा मैं
तेरे प्यार को मैं जिन्दा रखूँगा इन्ही लम्हों के आंगन में
ख्वाहिश की तो फेहरिस्त बहुत है, कुछ फिर कभी गाऊंगा मैं


बस ख्वाहिश थी तुझमें खोने की, हसरत भी रहेगी ग़म में रोने की साथ

Saturday, 13 April 2013

आंसुओं की किस्मत


न जाने इन आंसुओं की किस्मत में क्या है
बह चले हैं, मंजिल का पता क्या है

बेरंग होकर भी एक चमक है इनमें
हो ना हो कोई कसक है इनमें

दोस्ती इनकी धडकनों से है
दिल की उलझनों से है
दर्द से है, उनकी तरंगों से है

बेअदब हैं, बेबाक हैं ये
फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं

आँखों से निकली है जिनकी
व्यथा उनकी सुना जाते हैं

कभी बहते हैं किसी के इंतेजार में
कभी किसी के प्यार में

कभी सांसों के व्यापार में
कभी बाँहों के गलहार में

फिर रिश्तों के दरकिनार में
या प्रेमी के पुकार में

निः स्वार्थ और निष्पक्ष हैं ये
निर्मल और निश्छल भी

निरंतर अन्याय होता इन पर
रास्ते में ही मिट जाते अस्तित्व इनके

फिर भी बह चले हैं
ना जाने इनकी किस्मत में क्या है

Saturday, 2 February 2013

तुम क्यूँ न हुए मेरे


चुप से थे लव्ज़ पर आँखें बोल रही थी
समय के रेत पर हमारी धडकनें खेल रही थी
हम थे इतने पास कि सांसें विलय होती थी
स्पर्श से तुम्हारे एक उर्जा सम्मुख होती थी
सभी दुःख और व्याधि छू मंतर होती थी
और हँसी के पल में भी अश्रु बहा करते थे
अब नहीं वो अंगडाईयाँ हैं, अठखेलियों के भी निशां नहीं हैं
कहीं खो कर रह गयी अदा से झपकती पलकें
होठों के भी रंग धूमिल पड़े हैं
गुस्से और प्यार का मिश्रण नहीं अब
रूठ कर मनाना अब रास नहीं हैं
जाने उन पलों को मैंने खोया क्यूँ,
पूरा जो न हो सका,दिल ने वो ख्वाब पिरोया क्यूँ,
उन हसीं लम्हों को गवायाँ  क्यूँ
बस यही सवाल है दिल का...
तुम क्यूँ न हुए मेरे, तुम क्यूँ न हुए मेरे

Monday, 10 September 2012

ख्वाबों का जन्म



जानता हूँ मैं तुम्हें पा नहीं सकता,
फिर भी खोने का डर है मुझे
जानता हूँ तुम ख्वाबों से जा नहीं सकते,
फिर भी ख्वाबों को अकेला पाता हूँ
जानता हूँ  तुम भी अक्सर यादों में डूबते हो मेरे ,
फिर भी मैं तुम्हारी यादों को तन्हा पाता हूँ
जीवन कम हैं तनहाइयाँ अनवरत, किसका साथ निभाऊँ
मैं तो बस डरता हूँ तेरे ख्वाबों को खोने से
माना सभी ख्वाब पुरे नहीं होते
अधूरे ख्वाब ही जीवन को उत्प्रेरित करते हैं
काश ये मुमकिन होता
आधे तुम्हारे और आधे हमारे, मिलकर हो जाते एक ख्वाब पुरे
जीवन का फिर एक सारांश होता
और हम तुम एक शीर्षक होते
 दुनिया ये कहानी पढ़ती, उत्साहित होती
और फिर नए ख्वाबों का जन्म होता

ख़ामोशी और शोर


आज मैंने फिर सुना है अंतर्मन का शोर

व्याकुलता की सीमा लाँघ मैं गया उस ओर

ठंढ़ी आहें, गर्म हवाएँ, गर्जन बादलों का,

सप्त किरणों की लड़ियाँ ,

जिजीविषा की अपार सागर में,

गिन रहा था अनंत घड़ियाँ ,

लिए आशाओं की अनवरत डोर

अविरल और अनंत सी थी सभी परछाइयाँ

काश मैं कभी वापस न आता

जा कर कहीं उन किरणों में खो जाता

कोई आकान्छाएं न होती, जिजीविषा न होती

अचित्र और अनन्य होता सब कुछ

न होती ये ख़ामोशी और न ही कोई शोर

क्या मैं अब भी झूठा हूँ ?


कितना मैंने उसको चाहा, सपनों में भी भूल न पाया,
दिल से हरदम उसे लगाया,

पर वो कहती "तुम झूठे हो "

तन्हा कितनी रातें गुजारी, उसकी यादें आखों में रही,
तन मन उसको देना चाहा,

पर वो कहती "तुम झूठे  हो"

जीना तुम बिन कैसा जीना, अंगूठी जैसे बिन नगीना
जितना उसको भूलना चाहा, उतना करीब उसको पाया

पर वो  कहती "तुम झूठे हो "

होगी तुम्हारी भी कुछ मज़बूरी; आँसू होंगे आँखों में भी तेरी
तुम भी न भूल पायी मुझे,दिल में हमेशा मुझको पाया

फिर क्यूँ कहती "मैं  झूठा हूँ "?

मेरी कविता तुम से है, संगीत भी बस तुम्हीं से  है
जीवन के डोर के हर छोर पे मैंने तुझको पाया

फिर कैसे मैं झूठा हूँ ?

जागती आँखें ख्वाबों में, सिरहाने पर तुझको ढूँढ़ती हैं
सोयी आँखें सपने में, तुमसे ही बातें करती हैं
दिन को रौशन तुझमें पाया, रात को शीतल तुमने बनाया

"क्या मैं अब भी झूठा हूँ "?